उर्दू शायरी · ग़ज़ल

us but ki mohabbat mein aaKHir yahi karna tha

उस बुत की मोहब्बत में आख़िर यही करना था

اس بت کی محبت میں آخر یہی کرنا تھا

शायर: Maharaja Sir Kishan Parashad Shad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस बुत की मोहब्बत में आख़िर यही करना था
अपने से गुज़रना था सौ जान से मरना था

हुशियार हुए ग़ुंचे कर हो गए गोश-ए-गुल
बुलबुल तुझे गुलशन में यूँ शोर न करना था

मतलूब था कौन अपना था कौन ब-जुज़ उस के
किस पर हमें मरना था उस पे ही तो मरना था

हालत कहें क्या अपनी यूँ वस्ल की शब गुज़री
बेचैन यहाँ हम थे वाँ उन को सँवरना था

मय-ख़ाने में बुलवा कर उस पीर-ए-मुग़ाँ को 'शाद'
एहसान ये करना था साग़र मिरा भरना था