उर्दू शायरी · ग़ज़ल

un ko haal-e-dil-e-pur-soz suna kar uTThe

उन को हाल-ए-दिल-ए-पुर-सोज़ सुना कर उट्ठे

ان کو حال دل پر سوز سنا کر اٹھے

शायर: Zaheer Dehlvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उन को हाल-ए-दिल-ए-पुर-सोज़ सुना कर उट्ठे
और दो-चार के घर आग लगा कर उट्ठे

तुम ने पहलू में मिरे बैठ के आफ़त ढाई
और उठ्ठे भी तो इक हश्र उठा कर उट्ठे

वा'दा-ए-वस्ल से है ना'श पे आने की उम्मीद
मुज़्दा-ए-क़त्ल मिरा मुझ को सुना कर उट्ठे

मुँह छुपाने में तो है शर्म ओ हया का पर्दा
हाँ मगर दिल भी निगह था कि चुरा कर उट्ठे

आज आए थे घड़ी भर को 'ज़हीर'-ए-नाकाम
आप भी रोए हमें साथ रुला कर उट्ठे