उर्दू शायरी · ग़ज़ल

unki ada-e-naz ne yun chur kar diya

उन की अदा-ए-नाज़ ने यूँ चूर कर दिया

ان کی ادائے ناز نے یوں چور کر دیا

शायर: Faizi Ababeel8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उन की अदा-ए-नाज़ ने यूँ चूर कर दिया
पहले क़रीब ले गए फिर दूर कर दिया

ग़ैरों के तंज़ ज़ात को मज़बूत कर गए
अपनों की ला'न-ता'न ने काफ़ूर कर दिया

काँटे चुभे तो दर्द का शिकवा किए बग़ैर
हम ने हर एक शख़्स को 'मसरूर' कर दिया

हिजरत के मुज़्मिरात से वाक़िफ़ तो थे मगर
अहल-ए-सितम ने जाने पे मजबूर कर दिया

बाम-ए-फ़लक पे चाँद को इतनी ख़बर नहीं
आँखों को इंतिज़ार ने बे-नूर कर दिया

जब तक किसी से दूर थे गुम-नाम ही रहे
हम को किसी के क़ुर्ब ने मशहूर कर दिया

अब तो शदीद फ़र्क़ है उन के कलाम में
दौलत ने कैसे कैसों को मग़रूर कर दिया

'फ़ैज़ी' हुसूल-ए-‘इश्क़ के शौक़-ए-कमाल ने
जान-ए-हज़ीं को दर्द से भरपूर कर दिया