उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum ko wafa ki rah mein kya kya nahin mila

हम को वफ़ा की राह में क्या क्या नहीं मिला

ہم کو وفا کی راہ میں کیا کیا نہیں ملا

शायर: Faizi Ababeel6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम को वफ़ा की राह में क्या क्या नहीं मिला
सोज़-ए-जिगर मिला कहीं क़ल्ब-ए-हज़ीं मिला

दीवानगान-ए-‘इश्क़ की दुनिया ही और है
हुस्न-ए-ग़ज़ाल रूह में गोशा-नशीं मिला

देखा ये दिल तो आप की ही दस्तरस में है
रख कर कहीं गए थे मगर ये कहीं मिला

कितनी गुलाब सूरतें शहर-ए-अदा में थीं
सच पूछिए तो आप सा कोई नहीं मिला

दौर-ए-विसाल में बड़े ही फ़ासले रहे
‘अहद-ए-फ़िराक़ में हमें दिल से क़रीं मिला

'फ़ैज़ी' मलाल-ए-'उम्र है चाहत का फूल भी
पहुँचा किसी के हाथ में हम को नहीं मिला