उर्दू शायरी · ग़ज़ल

humne mata-e-jaan ko tum par luTa diya

हम ने मता'-ए-जान को तुम पर लुटा दिया

ہم نے متاع جان کو تم پر لٹا دیا

शायर: Faizi Ababeel7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम ने मता'-ए-जान को तुम पर लुटा दिया
तुम ने बड़े सुकून से हम को भुला दिया

लोगों ने हम से दर्द की तफ़्सील पूछ ली
हम ने भी शीशा थाम के नीचे गिरा दिया

चश्मान-ए-इंतिज़ार को उस का विसाल हो
जिस के मिलन की आस ने हम को थका दिया

हम ने भी जाने वाले को रोका नहीं कभी
जिस ने कहा कि जाना है रस्ता बना दिया

महफ़िल 'उरूज पर थी कि मैं ने ग़ज़ल पढ़ी
दाद-ए-सुख़न में लोगों ने दरिया बहा दिया

वो कहता था फ़िराक़ में मर जाऊँगा मगर
मैं ने भी उस को हिज्र में जी कर दिखा दिया

'फ़ैज़ी' बड़े तपाक से मिलते रहे उसे
फिर यूँ हुआ कि यार ने हम को भुला दिया