उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uljha hua bahut hai fasana hayat ka

उलझा हुआ बहुत है फ़साना हयात का

الجھا ہوا بہت ہے فسانہ حیات کا

शायर: Raakesh ulfat4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उलझा हुआ बहुत है फ़साना हयात का
तुम क्या समझ सकोगे बयाँ मेरी ज़ात का

कुछ भी कहूँ तो पहले ये रखता हूँ एहतियात
मतलब बदल न जाए कहीं मेरी बात का

छोटा सा एक लफ़्ज़-ए-मोहब्बत है और क्या
हल्क़ा बड़ा नहीं है मिरी काएनात का

अच्छा हुआ कि टूट गई थी हमारी नींद
अब तक हमें है याद बुरा ख़्वाब रात का