उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ujaD dun main ye duniya wo zor hai mujh mein

उजाड़ दूँ मैं ये दुनिया वो ज़ोर है मुझ में

اجاڑ دوں میں یہ دنیا وہ زور ہے مجھ میں

शायर: Faisal Fehmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उजाड़ दूँ मैं ये दुनिया वो ज़ोर है मुझ में
कई उदास हवाओं का शोर है मुझ में

मैं अपने आप का सब से बड़ा मुख़ालिफ़ हूँ
मिरी ही तरह का इक शख़्स और है मुझ में

मैं रक़्स-गाह-ए-जुनूँ इश्क़ की हूँ रूह-ए-रवाँ
तिरे भी जिस्म के जंगल का मोर है मुझ में

ये कह के उस ने मिरी वहशतों को थाम लिया
तिरे धड़कते हुए दिल की डोर है मुझ में

अजब नहीं कि मुझे लोग पूजने लग जाएँ
ज़माने भर के ख़ुदाओं की गोर है मुझ में