उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aur to kuchh nahin kiya hoga

और तो कुछ नहीं किया होगा

اور تو کچھ نہیں کیا ہوگا

शायर: Faisal Fehmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

और तो कुछ नहीं किया होगा
मैं ने फिर मौत को जिया होगा

उस के सागर से लब लगाए थे
उस ने इक घूँट तो पिया होगा

आज बुलबुल ने उस चमेली से
जाने क्या कान में कहा होगा

एक बाक़ी चराग़ था अच्छा
उस को तुम ने बुझा दिया होगा

कुछ दिनों क़ब्ल तक नया था मैं
अब जो है आज-कल नया होगा