उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ufuq saya safar dhoka qadam kartab

उफ़ुक़ साया सफ़र धोका क़दम कर्तब

افق سایہ سفر دھوکا قدم کرتب

शायर: Chandra Parkash Shad6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उफ़ुक़ साया सफ़र धोका क़दम कर्तब
बस इक ठोकर है और ये गर्द-ज़ार-ए-शब

मैं ख़ाली हो रहा हूँ इन ख़लाओं में
ज़बाँ से गिर रहे हैं लफ़्ज़ बे-मतलब

बदन दिखते नहीं चेहरे तो रौशन हैं
अजब सी मशअलें ले कर चले हैं सब

ये बहती मौज है पाताल तक गहरी
यहाँ क्या ढूँडते हो गुम-शुदा मंसब

नज़र हटती नहीं टेढ़ी लकीरों से
तअ'ज्जुब क्या जो हम हैं हर नफ़स बे-ढब

मुझे घेरे में रक्खें नद्दियाँ नाले
मैं शो'ला हूँ लपक जाऊँ न जाने कब