उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uDa kar sahn-e-gulshan se miTa kar aashiyan mera

उड़ा कर सहन-ए-गुलशन से मिटा कर आशियाँ मेरा

اڑا کر صحن‌ گلشن سے مٹا کر آشیاں میرا

शायर: Chakbast Braj Narayan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उड़ा कर सहन-ए-गुलशन से मिटा कर आशियाँ मेरा
मिरे साए के पीछे फिर रहा है बाग़बाँ मेरा

मिरे अहबाब पेश आते हैं मुझ से बेवफ़ाई से
वफ़ादारी में शायद कर रहे हैं इम्तिहाँ मेरा

हुजूम‌‌‌‌-ए-बे-कसी है शाम-ए-तन्हाई है और मैं हूँ
सदा-ए-चारागर बरहम न कर दे ये समाँ मेरा

सफ़ा-ए-क़ल्ब से अल्लाह रे इंसान की 'अज़्मत
फ़रिश्ते चूमते हैं आ के संग-ए-आस्ताँ मेरा

मुझे दैर-ओ-हरम से वास्ता क्या रिंद-मशरब हूँ
वही ईमान है जो कुछ कहे पीर-ए-मुग़ाँ मेरा