उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ubharti Dubti sanson ka silsila kyun hai

उभरती डूबती साँसों का सिलसिला क्यूँ है

ابھرتی ڈوبتی سانسوں کا سلسلہ کیوں ہے

शायर: Obaid Haris7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उभरती डूबती साँसों का सिलसिला क्यूँ है
कभी ये सोच कि जो कुछ हुआ हुआ क्यूँ है

बने हैं एक ही मिट्टी से हम सभी लेकिन
हमारी सोच में इस दर्जा फ़ासला क्यूँ है

लगा रखा है ये किस ने कड़ी को अंदर से
उजाड़ घर का दरीचा डरा डरा क्यूँ है

अभी तो फूल भी आए नहीं हैं शाख़ों पर
अभी से बोझ दरख़्तों पे पड़ रहा क्यूँ है

ठहर गया है वो आ कर अना के नुक़्ते पर
उसी के साथ मिरा वक़्त रुक गया क्यूँ है

तुम्हीं ने सोच के बिच्छू लगा के रक्खे थे
नहीं तो ज़ख़्म तुम्हारा हरा-भरा क्यूँ है

समझ रहा है कि तेरी कोई सुनेगा नहीं
तू अपने जिस्म की चीख़ों से बोलता क्यूँ है