उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har taraf nala-o-fariyaad ke manzar dekhen

हर तरफ़ नाला-ओ-फ़रियाद के मंज़र देखें

ہر طرف نالہ و فریاد کے منظر دیکھیں

शायर: Obaid Haris6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर तरफ़ नाला-ओ-फ़रियाद के मंज़र देखें
तुझ को देखें कि तिरा शहर-ए-सितमगर देखें

दूर से वो नज़र आएगा बस इक साए सा
उस को देखें तो ज़रा पास बुला कर देखें

चाँद सूरज न सितारे हैं हमारे बस में
एक मिट्टी का दिया है सो जला कर देखें

हम बदल सकते हैं ख़ुद को ये बड़ी बात नहीं
शर्त इतनी है कि बाहर नहीं अंदर देखें

मोम सा उस का बदन है यही कहते हैं सब
जी में आता है चलो आज उसे छू कर देखें

आज अख़बार में आई है ग़ज़ल 'हारिस' की
आदमी ख़ूब है कैसा है सुख़नवर देखें