उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu samajhta hai gar fuzul mujhe

तू समझता है गर फ़ुज़ूल मुझे

تو سمجھتا ہے گر فضول مجھے

शायर: Nadeem Gullani4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू समझता है गर फ़ुज़ूल मुझे
कर के हिम्मत ज़रा सा भूल मुझे

एक शफ़्फ़ाफ़ आईना था मैं
रास्ते ने किया है धूल मुझे

चोर रस्ते के साहिब-ए-दीवाँ
अँखड़ियाँ खोल कर क़ुबूल मुझे

मैं ज़माने पे तेरा क़र्ज़ा हूँ
कब करेगा भला वसूल मुझे