उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sahil pe tere baad ki virani kha gai

साहिल पे तेरे ब'अद की वीरानी खा गई

ساحل پہ تیرے بعد کی ویرانی کھا گئی

शायर: Nadeem Gullani3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

साहिल पे तेरे ब'अद की वीरानी खा गई
उतरे समुंदरों में तो तुग़्यानी खा गई

ताक़त ये चार दिन की है तारीख़ पढ़ ज़रा
सुल्तान कितने थे जिन्हें सुल्तानी खा गई

दुनिया बदल गई थी कोई ग़म न था मुझे
तुम भी बदल गए थे ये हैरानी खा गई