उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumhein hamari mohabbaton ke hasin jazbe bula rahe hain

तुम्हें हमारी मोहब्बतों के हसीन जज़्बे बुला रहे हैं

تمہیں ہماری محبتوں کے حسین جذبے بلا رہے ہیں

शायर: Nadeem Gullani4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम्हें हमारी मोहब्बतों के हसीन जज़्बे बुला रहे हैं
जो हम ने लिक्खे थे तुम पे हमदम वो सारे नग़्मे बुला रहे हैं

जो हक़ ग़रीबों का खा रहे हो तो याद रखना ऐ हुक्मरानो
कहीं पे तुम को भी ज़ुल्मतों के सुलगते रक़्बे बुला रहे हैं

हमारे लहजे की लरज़िशों से समझ सको तो समझ भी जाओ
तुम्हारे ग़म से लगे जो दिल पे वो सारे तम्ग़े बुला रहे हैं

'नदीम' दानिशवरों की महफ़िल कभी न कुछ भी 'अता करेगी
चलो कि ''जानी-पुरा' जहाँ पे वो यार कमले बुला रहे हैं