उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tu jab ghar se chala jata hai

तू जब घर से चला जाता है

تو جب گھر سے چلا جاتا ہے

शायर: Parveen Kumar Ashk6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तू जब घर से चला जाता है
पीछे रह भी क्या जाता है

मर जाने वाली हर शय पर
मेरा नाम लिखा जाता है

बर्फ़ का इक इक आँसू पी कर
दरिया वज्द में आ जाता है

शायद उस ने दस्तक सुन ली
देखो दर खुलता जाता है

अलिफ़ समझ में आ जावे तो
सब कुछ पढ़ना आ जाता है

आईने को 'अश्क' दिखाने
मेरे साथ ख़ुदा जाता है