उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi basti kisi nagar jao

किसी बस्ती किसी नगर जाओ

کسی بستی کسی نگر جاؤ

शायर: Parveen Kumar Ashk6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी बस्ती किसी नगर जाओ
वो नज़र आएगा जिधर जाओ

उस का जी भर चुका है फूलों से
ले के हाथों में अपना सर जाओ

हम हैं आवारगान-ए-शहर-ए-हयात
कौन हम से कहे कि घर जाओ

वो इसी रास्ते से गुज़रेगा
फूल बन कर यहीं बिखर जाओ

दिल पे पत्थर मैं रख के उठ आया
कोई कहता रहा ठहर जाओ

कब तलक यूँ जिओगे घुट-घुट के
इस से अच्छा है 'अश्क' मर जाओ