उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumhein kuchh ajnabi andar milenge

तुम्हें कुछ अजनबी अंदर मिलेंगे

تمہیں کچھ اجنبی اندر ملیں گے

शायर: Tahir Azeem6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम्हें कुछ अजनबी अंदर मिलेंगे
हम अपने शहर से बाहर मिलेंगे

जहाँ टपका है ख़ून-ए-दिल हमारा
वहाँ नक़्शों भरे पत्थर मिलेंगे

जुदाई हम पे शायद मुन्कशिफ़ हो
बिछड़ने के लिए अक्सर मिलेंगे

कोई आवाज़ दामन-गीर होगी
कई चेहरे हमें बढ़ कर मिलेंगे

तो फिर आवारगी का क्या बनेगा
हम ऐसे लोग जब घर पर मिलेंगे

सिपह-सालार तो कोई न होगा
कई बिखरे हुए लश्कर मिलेंगे