उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumhein aansu bahane ko bhi mil jaen kai kandhe

तुम्हें आँसू बहाने को भी मिल जाएँ कई कंधे

تمہیں آنسو بہانے کو بھی مل جائیں کئی کندھے (ردیف .. ا)

शायर: Pallav Mishra5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम्हें आँसू बहाने को भी मिल जाएँ कई कंधे
मगर मुझ को अज़िय्यत में परेशाँ कौन देखेगा

तुम्हीं जो उस की ख़ातिर जागते बैठे रहे शब भर
जो अब सो जाओ तो सुब्ह-ए-दरख़्शाँ कौन देखेगा

मैं भागा तो चला आऊँ तुम्हारी इक निदा सुन कर
सर-ए-वक़्त-ए-जुनूँ इनकार-ए-दरबाँ कौन देखेगा

मैं तेरे हिज्र में बैठा हुआ कुछ फूल गिन लूँगा
मियान-ए-बे-दिली रंग-ए-गुलिस्ताँ कौन देखेगा

तुम्हें क्यूँ फ़िक्र रहती है मिरे पिंदार की जानाँ
तुम्हारे रुख़ के आगे मुझ को उर्यां कौन देखेगा