उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lahu mein ghul ghul ke bah rahe the ragon ke andar

लहू में घुल घुल के बह रहे थे रगों के अंदर

لہو میں گھل گھل کے بہہ رہے تھے رگوں کے اندر (ردیف .. ے)

शायर: Pallav Mishra3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लहू में घुल घुल के बह रहे थे रगों के अंदर
हम अपनी मिट्टी में कुछ रवानी बचा रहे थे

उसे ख़बर भी नहीं हम उस शब ख़ामोश रह कर
बची हुई है जो इक कहानी बचा रहे थे

ये सोच किस दर्जा तिश्नगी से मरे थे हम लोग
कि पानी पी नहीं रहे थे पानी बचा रहे थे