उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qarib aane laga wo to raat gahri hui

क़रीब आने लगा वो तो रात गहरी हुई

قریب آنے لگا وہ تو رات گہری ہوئی

शायर: Pallav Mishra5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़रीब आने लगा वो तो रात गहरी हुई
वो रात ठहरी रही जब तलक दो-पहरी हुई

सबों ने अपने पियारों के लब चखे अलस्सुब्ह
गुज़ार कर शब-ए-हिज्राँ सबों की सहरी हुई

वो कौन होगा जो वापस न लौट पाएगा
है इंतिज़ार में इक रहगुज़ार ठहरी हुई

हमारे चेहरे की ज़र्दी पे हाथ रख उस ने
इक ऐसा रंग लगाया कि छब सुनहरी हुई

उड़ाए ख़ाक तो तारों से भर गए अफ़्लाक
बिछाए तार गरेबाँ के तो मसहरी हुई