उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kuchh aise do-jahan se rabta rakkha gaya hai

कुछ ऐसे दो-जहाँ से राब्ता रक्खा गया है

کچھ ایسے دو جہاں سے رابطہ رکھا گیا ہے

शायर: Pallav Mishra3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कुछ ऐसे दो-जहाँ से राब्ता रक्खा गया है
कि इन ख़्वाबीदा आँखों को खुला रक्खा गया है

मिरी आँखों में अब तू रेत पाएगा न पानी
यहाँ दरिया न सहरा बस ख़ला रक्खा गया है

पस-ए-पर्दा गले मिल कर वो शायद रो पड़ेंगे
जिन्हें पूरी कहानी में जुदा रक्खा गया है