उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tumhaari jumbish-e-lab ne kaha hai

तुम्हारी जुम्बिश-ए-लब ने कहा है

تمہاری جنبش لب نے کہا ہے

शायर: Ummaan Husain6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम्हारी जुम्बिश-ए-लब ने कहा है
तुम्हारे दिल में अब भी इक ख़ला है

ज़रा ऐ दोस्त मुझ को भी दिखाओ
तुम्हारे आस्तीं में क्या छुपा है

वो मिल जाए हमेशा दिल जो चाहे
फिर ऐसी ज़िंदगी में क्या रखा है

जो सच बोले ज़बाँ उस की कतर दो
यही हाकिम का अब के फ़ैसला है

मिरी ग़ज़लें पुरानी सोच की हैं
मिरा इस दौर में जीना सज़ा है

सुनो 'उम्मान' मेरी बात मानो
सभी को राज़-दाँ करना बुरा है