उर्दू शायरी · ग़ज़ल

furqat ke dinon mein tum jab hum ko bhula dena

फ़ुर्क़त के दिनों में तुम जब हम को भुला देना

فرقت کے دنوں میں تم جب ہم کو بھلا دینا

शायर: Ummaan Husain6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़ुर्क़त के दिनों में तुम जब हम को भुला देना
चेहरे से पशेमानी लाज़िम है मिटा देना

जज़्बात मिरे रख लो तुम ख़्वाब मिरे रख लो
जब ख़त को जलाना तुम इन को भी जला देना

पानी के सफ़र में जब तूफ़ान क़रीब आए
दरिया को कहानी तब मूसा की सुना देना

जब कुछ न समझ आए होती है 'इबादत क्या
तब तिश्ना परिंदों को पानी ही पिला देना

बच्चे जो अगर पूछें होती है मोहब्बत क्या
तब 'मीर' के उन को तुम अश'आर सुना देना

मोहतात हैं वो कितने 'उम्मान' ज़रा देखो
ख़ुद आग लगा कर के कहते हैं बुझा देना