उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum se to koi gila hum ko na tha ruk jate

तुम से तो कोई गिला हम को न था रुक जाते

تم سے تو کوئی گلہ ہم کو نہ تھا رک جاتے

शायर: Nadim Nadeem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम से तो कोई गिला हम को न था रुक जाते
रुकने देती जो अगर हम को अना रुक जाते

अच्छा चलते हैं कहा हम ने तो रस्मन उस ने
मुस्कुरा कर के फ़क़त इतना कहा रुक जाते

था सफ़र हम पे मुसल्लत सो हमें चलना था
वर्ना ये दिल तो कई बार हुआ रुक जाते

उन को रोका नहीं ये दुख तो रहेगा लेकिन
रोकते भी उन्हें गर हम जो तो क्या रुक जाते

कुछ नए रंग नए ख़्वाब बना सकते थे
हम उदासी के सफ़र में जो ज़रा रुक जाते