उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baur aae hain peDon pe

बौर आए हैं पेड़ों पे

بور آئے ہیں پیڑوں پے

शायर: Nadim Nadeem8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बौर आए हैं पेड़ों पे
घर उजड़ेंगे चिड़ियों के

बारूदों का दौर है ये
बम गिरते हैं झूलों पे

चोट लगी थी सीने पर
ख़ूँ बहता है नथुनों से

जान बचाए फिरते हैं
लोग आवारा कुत्तों से

कीच में लोट के भी ख़ुश हैं
चेहरे देखो सुअरों के

जिस का मन हो ले ले काम
हम कोल्हू के बैलों से

कितने हामिद लौट आए
कचरा बीन के मेलों से

सय्यद साहब की यारी
सक़्कों और जुलाहों से