उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dilon ke khel mein bhi kaam le liya dimagh se

दिलों के खेल में भी काम ले लिया दिमाग़ से

دلوں کے کھیل میں بھی کام لے لیا دماغ سے

शायर: Nadim Nadeem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिलों के खेल में भी काम ले लिया दिमाग़ से
चुरा लिया है फूल मैं ने ज़िंदगी के बाग़ से

वो जानता है ख़ामुशी से रास्ते निकालना
सवाल क्या करें भला हम ऐसे ख़ुश-दिमाग़ से

तुम्हारी छाओं पा के दिल कुछ इतना मुतमइन है अब
न मंज़िलों से काम है न राह के सुराग़ से

बिखेरता है रौशनी रिदा-ए-आसमाँ से वो
सितारे जैसे ओढ़नी में पड़ गए हों दाग़ से

मैं रंग रंग था उदासियों का कोई क़ाफ़िला
मैं नूर नूर हूँ तुम्हारे 'इश्क़ के चराग़ से