उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aazar ke is KHauf mein aazar se pahle

आज़ार के इस ख़ौफ़ में आज़ार से पहले

آزار کے اس خوف میں آزار سے پہلے

शायर: Nadim Nadeem5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आज़ार के इस ख़ौफ़ में आज़ार से पहले
मर जाए मसीहा न ये बीमार से पहले

आवाज़ लगाई कभी तलवार गिराई
आगाह किया हम ने उसे वार से पहले

उस सल्तनत-ए-हुस्न की शहज़ादी को बतलाओ
दरवेश ठहर जाते हैं दरबार से पहले

हर चीज़ का वो दाम बताएँगे बढ़ा कर
कुछ लोग मिलेंगे तुम्हें बाज़ार से पहले

दो जलते दिए दिन के उजाले में रखे थे
या'नी मिरी आँखें तिरे दीदार से पहले