उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tum sath to bahaar zamane ki talKHiyan

तुम साथ तो बहार ज़माने की तल्ख़ियाँ

تم ساتھ تو بہار زمانے کی تلخیاں

शायर: Aamir Rahmati6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुम साथ तो बहार ज़माने की तल्ख़ियाँ
वर्ना जिगर के पार ज़माने की तल्ख़ियाँ

जब तक तुम्हारा साथ था ऐ मेरे हम-सफ़र
देखी न एक बार ज़माने की तल्ख़ियाँ

जिस दिन से मुझ से रूठ गए मेरे यार तुम
उतरी जिगर के पार ज़माने की तल्ख़ियाँ

मा'सूम बन के सहते रहें ऐ मिरे ख़ुदा
कब तक ये बादा-ख़्वार ज़माने की तल्ख़ियाँ

दर-अस्ल बात ये है जो तुम तक न आ सका
करता फिरे शुमार ज़माने की तल्ख़ियाँ

ये तो करम है उन का वगरना लिपटने को
'आमिर' हैं बे-क़रार ज़माने की तल्ख़ियाँ