उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaun kahwe hai nasim-e-sahari aawe hai

कौन कहवे है नसीम-ए-सहरी आवे है

کون کہوے ہے نسیم سحری آوے ہے

शायर: Aamir Rahmati7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कौन कहवे है नसीम-ए-सहरी आवे है
गुल-बदन ओढ़े सहर एक परी आवे है

दर्द-ए-उल्फ़त को बढ़ाते हैं घटा देते हैं
उफ़ बला की उन्हें तो बख़िया-गरी आवे है

इस भरे शहर में मेरे सिवा कोई भी नहीं
एक हम हैं जिसे शोरीदा-सरी आवे है

बक़िया तो नक़्ल-ए-मकानी किया करते हैं सब
हम को या 'जौन' को ही नौहागरी आवे है

रक़्स में डूब के जाने करे है क्या क्या दिल
सामने जब मिरे वो एक परी आवे है

जिस को देखो उसे दीवाना बना देते हो
ख़ूब तुम को भी सनम 'इश्वा-गरी आवे है

ज़ख़्म जिन से है मिला एक उन्हें ही 'आमिर'
शहर भर में यहाँ बस चारागरी आवे है