उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab bhi dil be-qarar hota hai

जब भी दिल बे-क़रार होता है

جب بھی دل بے قرار ہوتا ہے

शायर: Aamir Rahmati6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब भी दिल बे-क़रार होता है
शोर अन्दर हज़ार होता है

ढाँप लेते हैं 'ऐब सारे ही
जिस को भी उन से प्यार होता है

ऐ सनम तेरे इक तग़ाफ़ुल पर
दिल मिरा तार तार होता है

देख कर तेरे इस तबस्सुम को
गुल में तब्दील ख़ार होता है

ये मोहब्बत है क्या कि फिर होगी
'इश्क़ है एक बार होता है

तल्ख़ लहजा ज़रा सँभालो तुम
दिल के ये आर-पार होता है