उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaho to kya ye masala hai ain shin qaf ka

कहो तो क्या ये मसअला है 'ऐन शीन क़ाफ़ का

کہو تو کیا یہ مسئلہ ہے عین شین قاف کا

शायर: Aamir Rahmati7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहो तो क्या ये मसअला है 'ऐन शीन क़ाफ़ का
जी रस्ता मुश्किलों-भरा है 'ऐन शीन क़ाफ़ का

इसे किए बग़ैर ख़ुद ख़ुदा भी रह नहीं सका
यही तो दोस्त मो'जिज़ा है 'ऐन शीन क़ाफ़ का

बने फिरे हैं क़ैस आज-कल जो उन से पूछिए
उन्हें ज़रा सा भी पता है 'ऐन शीन क़ाफ़ का

यहाँ वहाँ न देख शैख़ जा चला जा मय-कदे
अगर जो रक़्स देखना है 'ऐन शीन क़ाफ़ का

सिनाँ की नोक पर करा दे जो इमाम से सना
हुज़ूर ऐसा मर्तबा है 'ऐन शीन क़ाफ़ का

तिरे बग़ैर चल नहीं सकेंगे इक क़दम भी हम
बहुत कठिन ये रास्ता है 'ऐन शीन क़ाफ़ का

कहीं पे कर्बला कहीं पे हश्र बरपा कर दिया
ये मुख़्तसर सा वाक़ि'आ है 'ऐन शैन क़ाफ़ का