उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhe pane ki KHwahish phir jagi hai

तुझे पाने की ख़्वाहिश फिर जगी है

تجھے پانے کی خواہش پھر جگی ہے

शायर: Gaurav Trivedi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझे पाने की ख़्वाहिश फिर जगी है
मगर अफ़सोस ये तो ख़ुद-कुशी है

मुझे आवाज़ दे मैं जी उठूँगा
तिरी आवाज़ उदासी तोड़ती है

तिरी तस्वीर को देखूँ तो मुझ को
अभी तक प्यार से ही देखती है

अगर तू ख़ुश नहीं है तो चली जा
मुझे तो ख़ैर बस अपनी पड़ी है

मिरा क्या है मिरा अफ़सोस भी क्या
तिरे आगे तो पूरी ज़िंदगी है