उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhe hai pyar to yun karke chal dikha mujhko

तुझे है प्यार तो यूँ करके चल दिखा मुझ को

تجھے ہے پیار تو یوں کرکے چل دکھا مجھ کو

शायर: Raakesh ulfat7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझे है प्यार तो यूँ करके चल दिखा मुझ को
सभी के सामने अपने गले लगा मुझ को

मैं जानता हूँ कि तू इक दहकता शो'ला है
तिरी तपिश में अगर दम है तो जला मुझ को

हर इक नज़र को पता है मैं एक पत्थर हूँ
हर एक दिल ने बना रखा है ख़ुदा मुझ को

तिरी ज़बाँ पे है इंकार आज भी लेकिन
कुछ और कहती लगी है तिरी अदा मुझ को

न अब रहा है कोई शौक़ बनने ठनने का
न अपनी ओर बुलाता है आईना मुझ को

कहीं नदी कहीं दरिया कहीं समुंदर हूँ
ये नाम देता है पानी का सिलसिला मुझ को

उन्हें है शौक़ अगर आज़माने का 'उल्फ़त'
ग़ुरूर अपनी वफ़ा पर भी है बड़ा मुझ को