उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhe ai dost mera tarjuman hona hai

तुझे ऐ दोस्त मिरा तर्जुमान होना है

تجھے اے دوست مرا ترجمان ہونا ہے

शायर: Vaibhav Kumar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझे ऐ दोस्त मिरा तर्जुमान होना है
तिरे ही लब से मिरा ग़म बयान होना है

मुझे तो 'इश्क़ ही करना था 'इश्क़ करता रहा
कहाँ ख़बर थी कोई इम्तिहान होना है

हताश किस लिए होता है तू मिरे शा'इर
तिरे वुजूद को कल दास्तान होना है

जहाँ पे आख़िरी साँसें गिनीं थीं लैला ने
वहीं पे क़ैस का भी इम्तिहान होना है