उर्दू शायरी · ग़ज़ल

fasad karte hue har kisi se bhul hui

फ़साद करते हुए हर किसी से भूल हुई

فساد کرتے ہوئے ہر کسی سے بھول ہوئی

शायर: Vaibhav Kumar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़साद करते हुए हर किसी से भूल हुई
हसद में डूब चुके आदमी से भूल हुई

हसीन होंट पे रख्खा हसीन तिल उस ने
बनाने वाले से क्या सादगी से भूल हुई

जो तू खड़ी थी तो पच्छिम की ओर तकता रहा
तुझे निहार के सूरज-मुखी से भूल हुई

जवान लाश पे देखा जो चौदहवीं का चाँद
ख़ुदा क़सम ये लगा चाँदनी से भूल हुई

ये अश्क बहते रहे सब ग़ज़ल समझते रहे
मुझे परखने में सच-मुच सभी से भूल हुई