उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tujhse ham-dam mujhko ulfat hai bahut

तुझ से हम-दम मुझ को उल्फ़त है बहुत

تجھ سے ہم دم مجھ کو الفت ہے بہت

शायर: Dagh Niyazi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुझ से हम-दम मुझ को उल्फ़त है बहुत
तेरी उल्फ़त वज्ह-ए-राहत है बहुत

तुम अभी तो आए हो मेरे क़रीब
किस लिए जाने की उजलत है बहुत

सूरत-ए-परवाना मिट जाऊँगा मैं
मुझ में मिट जाने की हिम्मत है बहुत

तेरे रुख़ से माँग लाए हैं निखार
इस लिए फूलों में रंगत है बहुत

बस्तियों में आ गए हैं भेड़िये
शहर में हर सम्त दहशत है बहुत

'दाग़' बाक़ी है अभी क्या बरहमी
ज़ुल्म की मुझ पर जो शिद्दत है बहुत