उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is chaman-zar ko sahra na banao yaro

इस चमन-ज़ार को सहरा न बनाओ यारो

اس چمن زار کو صحرا نہ بناؤ یارو

शायर: Dagh Niyazi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस चमन-ज़ार को सहरा न बनाओ यारो
अपने हाथों से नशेमन न जलाओ यारो

चोट लगते ही बिखर जाएगा आईना-ए-दिल
संग-दिल मत बनो पत्थर न उठाओ यारो

उस ने चाहा तो लिया काम अबाबीलों से
उस के दरबार में सर अपना झुकाओ यारो

दर्ज तारीख़ के औराक़ में होना है तुम्हें
इस क़दर ख़ुद को न मजबूर बनाओ यारो

अज़्मत-ए-ख़ाक-ए-वतन पर न कहीं हर्फ़ आए
है वतन ख़तरे में अब होश में आओ यारो

मुझ को है ख़ौफ़ कि आँसू न बरस जाएँ कहीं
शीशा-ए-दिल को न तुम ठेस लगाओ यारो

डूबे कश्ती न कहीं 'दाग़' के अरमानों की
बहर-ए-जज़्बात में तूफ़ान उठाओ यारो