उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nikhat-o-nur ka saman hoga

निकहत-ओ-नूर का समाँ होगा

نکہت و نور کا سماں ہوگا

शायर: Dagh Niyazi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

निकहत-ओ-नूर का समाँ होगा
उस का चर्चा जहाँ-जहाँ होगा

वो जहाँ भी हो आसमाँ होगा
ये न पूछो कहाँ कहाँ होगा

बे-ज़मीरी का राज़ अगर खोलूँ
उस का चेहरा धुआँ धुआँ होगा

जान-ओ-दिल से मैं चाहता हूँ जिसे
मुझ से क्या वो भी बद-गुमाँ हो गा

मौसम-ए-नफ़रत-ओ-तअ'स्सुब है
अब तो गुलशन ये बे-निशाँ होगा

क्या अभी और ज़ख़्म खाने हैं
क्या अभी और इम्तिहाँ होगा

ढा रहा है जो 'दाग़' ज़ुल्म-ओ-सितम
एक दिन वो भी मेहरबाँ होगा