उर्दू शायरी · ग़ज़ल

taKHt-o-taj aur na kuchh mal-o-zar chahiye

तख़्त-ओ-ताज और न कुछ माल-ओ-ज़र चाहिए

تخت و تاج اور نہ کچھ مال و زر چاہیے

शायर: Dagh Niyazi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तख़्त-ओ-ताज और न कुछ माल-ओ-ज़र चाहिए
मुझ को तो सिर्फ़ उस की ख़बर चाहिए

धूप आँगन से जाती नहीं है कभी
साए के वास्ते इक शजर चाहिए

दर-ब-दर ठोकरें खा के आया हूँ मैं
मेरे सर को तिरा संग-ए-दर चाहिए

तोड़ दे जो क़फ़स की सभी तीलियाँ
मुझ को वो क़ुव्वत-ए-बाल-ओ-पर चाहिए

जिन की रातें गुज़रती हैं ज़ेर-ए-फ़लक
उन को भी शहर में कोई घर चाहिए

नक़्श-ए-ग़म जो मिटा दे दिल-ए-ज़ार का
'दाग़' को वो करम की नज़र चाहिए