उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tughyaniyon ka jitna ghurur aur baDh gaya

तुग़्यानियों का जितना ग़ुरूर और बढ़ गया

طغیانیوں کا جتنا غرور اور بڑھ گیا

शायर: Pandit Aks Lucknowi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तुग़्यानियों का जितना ग़ुरूर और बढ़ गया
उतना ही मेरा अज़्म-ए-उबूर और बढ़ गया

घबरा रहे थे लोग कि बुझ जाएगा चराग़
लेकिन हवा-ए-तेज़ में नूर और बढ़ गया

इस वाक़िए से पहले उसे जानता था कौन
मूसा की वजह से क़द-ए-तूर और बढ़ गया

जितना जकड़ के रक्खा था सय्याद ने उन्हें
इतना ही कारवान-ए-तुयूर और बढ़ गया

क्या साथ साथ आओगे पूछा जो दर्द ने
दिल ने कहा जनाब ज़रूर और बढ़ गया

दिल में दबा हुआ था नशा इश्क़ का मगर
उन से मिली नज़र तो सुरूर और बढ़ गया