उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum aansuon sa ubal rahe hain

हम आँसुओं सा उबल रहे हैं

ہم آنسوؤں سا ابل رہے ہیں

शायर: Pandit Aks Lucknowi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम आँसुओं सा उबल रहे हैं
आँखों से तिरी निकल रहे हैं

तुम साथ कहीं नहीं हो लेकिन
हम साथ तुम्हारे चल रहे हैं

ये किस का इंतिज़ार है आज
लम्हात सदी में ढल रहे हैं

मेहमाँ की तरह वो अश्क बन कर
आँखों में हमारी पल रहे हैं

रहना है तुम्हारे दिल में वर्ना
क़दमों में कई महल रहे हैं

महफ़िल में नवाज़ा जिन गुलों को
गुलशन में उन्हें मसल रहे हैं

बे-कार हैं 'अक्स' दिन में जुगनू
सूरज के उजाले खल रहे हैं