उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum jaise dil-e-muztar ki tarah zaKHmon ka mudawa kaun kare

हम जैसे दिल-ए-मुज़्तर की तरह ज़ख़्मों का मुदावा कौन करे

ہم جیسے دل مضطر کی طرح زخموں کا مداوا کون کرے

शायर: Pandit Aks Lucknowi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम जैसे दिल-ए-मुज़्तर की तरह ज़ख़्मों का मुदावा कौन करे
इक चारागर-ए-दिल की ख़ातिर फिर तुर्फ़ा तमाशा कौन करे

तूफ़ान से बचने की ख़ातिर साहिल से तक़ाज़ा कौन करे
मौसम तो बदलता रहता है मौसम का भरोसा कौन करे

गिर्दाब तलातुम मौज सफ़र मस्तूल सफ़ीना साहिल रेत
इन सब से उलझने वालों में दरिया से किनारा कौन करे

कुछ काम क़नाअत से भी लो कुछ ख़्वाब अधूरे रहने दो
क़तरे में समाया हो दरिया तो प्यास को रुस्वा कौन करे

आलाम की अफ़रातफ़री में इंसान जिए तो कैसे भला
मरना भी जहाँ आसान न हो जीने की तमन्ना कौन करे

है दाँव पर अपनी जान मगर लब पर न कोई शिकवा न गिला
अब इश्क़ के कारोबार में भी तिल भर भी ख़सारा कौन करे

दिल उस की तरफ़ है जिस की तरफ़ दुनिया है मिरी आँखें हैं 'अक्स'
क्या इस से ज़ियादा और कहूँ ज़ाहिर में इशारा कौन करे