उर्दू शायरी · ग़ज़ल

toD di sare jahan se dosti achchha kiya

तोड़ दी सारे जहाँ से दोस्ती अच्छा किया

توڑ دی سارے جہاں سے دوستی اچھا کیا

शायर: Gaurav Trivedi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तोड़ दी सारे जहाँ से दोस्ती अच्छा किया
और ख़ुद से भी कोई ख़्वाहिश न की अच्छा किया

इक क़सम जो रोक सकती थी हमारी रुख़्सती
ख़ैर तुम ने वो क़सम हम को न दी अच्छा किया

लौटता तो देखता कुछ और पैरों के निशान
पर न लौटा मैं कभी उस की गली अच्छा किया

लोगों का बरताव तो था ही बहुत बेकार पर
ख़ुद से मैं ने कौन सा ख़ुद भी कभी अच्छा किया

अब तो झूटे मुँह भी तुम कहते नहीं हो प्यार है
तुम ने आख़िर छोड़ ही दी दिल-लगी अच्छा किया