उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri talash mein jo KHud ko bhul aae the

तिरी तलाश में जो ख़ुद को भूल आए थे

تری تلاش میں جو خود کو بھول آئے تھے

शायर: Parvin Shere6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी तलाश में जो ख़ुद को भूल आए थे
पता वो अपना कभी ढूँडने न पाए थे

किसे ख़बर थी कि फूलों में भी हुनर है वही
किस एहतियात से काँटों से बच के आए थे

वो बे-हिसी का था 'आलम ज़रा ख़बर न हुई
कि रौशनी थी सर-ए-रहगुज़र कि साए थे

किनारे दूर बहुत दूर थे तू मजबूरन
समुंदरों में ही लोगों ने घर बसाए थे

हर एक बूँद कई बिजलियों की हामिल थी
शदीद बरखा ने बस्ती के घर जलाए थे

ये कैसे बोझ चले आए फिर से पलकों पर
कि इक ज़माने पे हम आज मुस्कुराए थे