उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere dimagh se sara futur niklega

तिरे दिमाग़ से सारा फ़ुतूर निकलेगा

ترے دماغ سے سارا فتور نکلے گا

शायर: Aalam Nizami5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरे दिमाग़ से सारा फ़ुतूर निकलेगा
मिरी वफ़ा का नतीजा ज़रूर निकलेगा

न सर उठा के चलो पत्थरों की बस्ती में
लगेगी ठेस तो सारा ग़ुरूर निकलेगा

तू हौसले से अंधेरे का सामना करियो
इसी अंधेरे के पहलू से नूर निकलेगा

निज़ाम-ए-‘अद्ल तो मर'ऊब मुजरिमों से है
हमें यक़ीं है हमारा क़ुसूर निकलेगा

हैं चंद रोज़ की मेहमान उलझनें 'आलम'
तिरे सुकून का सूरज ज़रूर निकलेगा