उर्दू शायरी · ग़ज़ल

Thik hai thoDa bahut sharmao mujhse

ठीक है थोड़ा बहुत शरमाओ मुझ से

ٹھیک ہے تھوڑا بہت شرماؤ مجھ سے

शायर: Vikram Sharma6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ठीक है थोड़ा बहुत शरमाओ मुझ से
हाँ मगर ये अजनबी बरताव मुझ से

रब्त में तब्दीलियाँ लाते रहो और
जैसा मन हो वैसे धोका खाओ मुझ से

ये नई रस्म-ए-मोहब्बत है कि उस को
चाहिए कुछ रोज़ का अलगाव मुझ से

सब रवाँ लहरें मिरे पाँव तक आईं
आ गया दरिया में फिर ठहराव मुझ से

अपने घर में मुँह छुपाता फिर रहा हूँ
आइने का हो गया टकराओ मुझ से

मैं तो अपनी कश्ती अपनी मौज में हूँ
नाख़ुदा को खलता है अलगाव मुझ से