उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek KHamoshi ne sada pai

एक ख़ामोशी ने सदा पाई

ایک خاموشی نے صدا پائی

शायर: Vikram Sharma5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक ख़ामोशी ने सदा पाई
ढाई हर्फ़ों में फिर वो हकलाई

चार दीवार चंद छिपकलियाँ
हिज्र की रात के तमाशाई

डूबने का उसे मलाल नहीं
जिस ने देखी नदी की रानाई

आख़िरी ट्रेन थी तिरी जानिब
जो ग़लत प्लेटफार्म पर आई

बारिशों ने हमें उदास किया
सील दीवार में उतर आई