उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghamon ki sui mein yaaden piro kar

ग़मों की सूई में यादें पिरो कर

غموں کی سوئی میں یادیں پرو کر

शायर: Vikram Sharma6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़मों की सूई में यादें पिरो कर
उदासी ने बुना है मेरा स्वेटर

किसी तन्हाई का बेताल मुझ से
आ लिपटा नाम के धोके में आ कर

ज़ियादा वज़्न है टूटे न कश्ती
बचा ले ख़ुद को तू मुझ को गिरा कर

सवेरे काम पर लौटा करूँगा
दिहाड़ी में मिली शब को गँवा कर

तुम्हें कुछ याद है तुम ढूँढते थे
मैं खो जाता था जब ख़ुद को छुपा कर

गली में गश्त पर आसेब है अब
सो घर को ही बना लेना है दफ़्तर