उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aisa thoDi hai achanak ye ghaDi aai hai

ऐसा थोड़ी है अचानक ये घड़ी आई है

ایسا تھوڑی ہے اچانک یہ گھڑی آئی ہے

शायर: Vikram Sharma4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐसा थोड़ी है अचानक ये घड़ी आई है
वक़्त के साथ उदासी में कमी आई है

पाँव बे-साख़्ता उस ओर चले जाते हैं
कौन रहता है यहाँ किस की गली आई है

अब मैं तन्हाई की बातों में तो आने से रहा
अब नहीं जाऊँगी कहती है बड़ी आई है

मुद्दतों बा'द कोई ख़्वाब नया देखा है
सुब्ह-दम दिल-नुमा पौदे पे कली आई है